Rajasthan Sarpanch Salary, Allowances & Powers 2026

By | September 17, 2026

Rajasthan Sarpanch Salary, Allowances & Powers 2026

सरपंच को कितनी सैलरी मिलती है? जानिये सरपंच की 5 सबसे बड़ी पावर, जिसके लिए बहता है पानी की तरह पैसा!

राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है और गांवों में चुनावी माहौल पूरी तरह से गर्म है। सरपंच का चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहा देते हैं। बड़ी-बड़ी गाड़ियों के काफिले, रात-दिन की दावतें और चुनाव प्रचार में लाखों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं।

यह सब देखकर आम आदमी के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि “आखिर एक सरपंच को सरकार कितनी सैलरी देती है, जो लोग इस पद के लिए इतना पैसा खर्च करते हैं?”

आज की इस पोस्ट में हम आपको सरपंच की कुर्सी का वह असली सच बताने जा रहे हैं, जो हर वोटर और उम्मीदवार को जानना चाहिए। हम जानेंगे कि सरपंच की ऑफिशियल सैलरी (मानदेय) कितनी होती है और आखिर वो कौन सी 5 सबसे बड़ी पावर्स (अधिकार) हैं, जिनके दम पर एक सरपंच पूरे गांव पर राज करता है।

सरपंच को कितनी सैलरी (मानदेय) मिलती है?

अगर आपको लगता है कि सरपंच को किसी सरकारी अधिकारी की तरह हर महीने 50-60 हजार रुपये की मोटी सैलरी मिलती है, तो आप बिल्कुल गलत हैं।

पंचायती राज नियमों के अनुसार, सरपंच के पद को एक ‘सेवा’ का पद माना जाता है, इसलिए इन्हें सैलरी नहीं बल्कि ‘मानदेय’ (Honorarium) दिया जाता है।

मासिक मानदेय: राजस्थान में वर्तमान में एक सरपंच को लगभग ₹4,800 से ₹5,000 प्रति माह का मानदेय मिलता है। (अलग-अलग राज्यों में यह राशि थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन राजस्थान में औसतन यही है)।

बैठक भत्ता (Meeting Allowance): इसके अलावा, सरपंच को पंचायत समिति या ग्राम सभा की बैठकों में भाग लेने के लिए प्रति बैठक कुछ निर्धारित भत्ता (Allowance) और यात्रा खर्च (TA/DA) दिया जाता है।

💰 सरपंच की कुर्सी का असली सच 💰

सैलरी या करोड़ों का बजट?

जानिए सरपंच की 5 सबसे बड़ी पावर

जिसके लिए चुनाव में खर्च कर दिए जाते हैं लाखों रुपये 👇

अब सवाल यह उठता है कि सिर्फ 5,000 रुपये महीने (यानी साल के 60,000 रुपये) के लिए कोई चुनाव में 10-20 लाख रुपये क्यों खर्च करेगा? इसका जवाब छिपा है सरपंच की ‘पावर्स’ और पंचायत के बजट में।

सरपंच की 5 सबसे बड़ी पावर्स (Top 5 Powers of Sarpanch)

सरपंच गांव का ‘मुख्यमंत्री’ होता है। गांव के विकास का पूरा करोड़ों का बजट उसी के साइन (हस्ताक्षर) से पास होता है। यही कारण है कि इस पद का इतना रुतबा है। आइए जानते हैं सरपंच की 5 सबसे बड़ी ताकतें:

1. ग्राम पंचायत का करोड़ों का बजट (Financial Power)

यह सरपंच की सबसे बड़ी ताकत है। राज्य वित्त आयोग (SFC) और केंद्रीय वित्त आयोग (CFC) से सीधे ग्राम पंचायत के खाते में विकास कार्यों के लिए हर साल लाखों-करोड़ों रुपये का फंड आता है।

गांव में सीसी सड़क (CC Road) बननी हो, नाली निर्माण हो या पानी की टंकी बननी हो, यह सारा पैसा सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी (VDO/सचिव) के संयुक्त डिजिटल सिग्नेचर (Dongle) से ही निकलता है।

2. नरेगा (MGNREGA) पर पूरा नियंत्रण

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसका पूरा कंट्रोल सरपंच के पास होता है।

गांव में नरेगा के तहत कौन सा काम होगा, कहाँ मस्टरोल (Muster roll) जारी होंगे, और किन लोगों को रोजगार (या मेट का पद) मिलेगा, यह सब तय करने में सरपंच की मुख्य भूमिका होती है।

3. सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का चयन (Govt Schemes)

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सरपंच की कुर्सी का असली सच

कितनी होती है सरपंच की सैलरी?

जानिये 5 सबसे बड़ी पावर!

सरकार कितनी भी योजनाएं बना ले, लेकिन गांव में उसका असली फायदा किसे मिलेगा, यह काफी हद तक सरपंच तय करता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत घर किसे मिलेगा, बीपीएल (BPL) सूची में किसका नाम जुड़ेगा, और वृद्धावस्था/विधवा पेंशन के लिए पात्र कौन है—इन सभी सूचियों को ग्राम सभा के माध्यम से सरपंच ही अंतिम मंजूरी देता है।

4. प्रमाण पत्र और NOC जारी करना (Issuing Certificates)

गांव के किसी भी व्यक्ति को अपना कोई भी सरकारी काम करवाना हो, उसे सरपंच की मुहर और हस्ताक्षर की जरूरत पड़ती ही है।

मूल निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate), जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने हों या बिजली/पानी के कनेक्शन के लिए NOC चाहिए—इन सब पर सबसे पहले सरपंच की मुहर लगती है।

5. ग्राम सभा की अध्यक्षता और न्यायिक अधिकार

सरपंच ग्राम सभा और ग्राम पंचायत का अध्यक्ष होता है।

गांव के छोटे-मोटे आपसी विवाद, जमीनी झगड़े या पारिवारिक मसलों को सुलझाने के लिए पंचायत बैठाई जाती है, जिसमें सरपंच का फैसला (पंच-पटेल के रूप में) बहुत अहम माना जाता है। गांव के स्कूल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र की निगरानी का अधिकार भी सरपंच के पास ही होता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, एक सरपंच की सैलरी भले ही 5,000 रुपये महीना हो, लेकिन उसके कलम की ताकत करोड़ों रुपये की होती है। एक ईमानदार और पढ़ा-लिखा सरपंच चाहे तो 5 साल में सरकारी बजट का सही इस्तेमाल करके अपने गांव को ‘स्मार्ट विलेज’ बना सकता है।

आपके नजरिए से, गांव के विकास के लिए एक सरपंच में सबसे जरूरी गुण क्या होना चाहिए? ईमानदारी, अच्छी शिक्षा या कड़क स्वभाव? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें!

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